विविधा


  • मेरी खिड़की का कैनवस

    मेरे घर की खिड़की पे पानी सा-शीशा हैपानी-सा शीशा कैनवस बन जाता है । क़ुदरत के रंग और मौसम की रंगतख़ुद में उतारकर अद्भुत बन जाता है । खिड़की के कैनवस पर शाखें इतरातींनए रूप-रंग चित्रकारी दिखातीं ।पेड़ों के झुरमुटों को हवा पंख देतीहिलाकर झुला कर चुपचाप सरक लेती । जब आया पतझड़ तो पत्तियाँ…

  • मेरी फूलों की टोकरी

    आज चैत्र मास की पहली तिथि है और मन विराट प्रकृति के विस्तार में लीन हो जाना चाहता है। बचपन की यादों का सिलसिला स्मृति-पटल पर छा-सा गया है। मैं हिमालय के आँगन में बसे अपने गाँव की ओर खिंची चली जा रही हूँ जहाँ आज के दिन हम फूल धेई नाम का पर्व मनाते…

  • पाँचवाँ पीरियड

    विद्यालय में मुझे अगर कोई पीरियड सबसे अनोखा लगता है तो वह है पाँचवाँ पीरियड । क्योंकि वह हमेशा ब्रेक के बाद होता है । मॉर्निंग असेंबली के बाद तो बच्चे अपनी -अपनी लाइन में ही सीधे कक्षा में चले जाते हैं । इधर -उधर करने की गुंजाइश नहीं रहती । पाँचवाँ पीरियड तो जैसे…

  • धीरू

    तुम्हारा नाम धीरज है पर मैं तुम्हें प्यार से ‘धीरू’ ही कहती हूँ।जाने अनजाने मैं कब से तुम्हें इस नाम से पुकारने लगी,याद नहीं। दो अप्रैल का दिन था।आज से स्कूल का नया सैशन शुरू होने वाला था।साल के पहले दिन अध्यापकों में नया जोश रहता है।बच्चे भी इससे अछूते नहीं रहते।मार्निंग असेंबली के बाद…

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