वीर जब बोलना शुरू करता तो उसके हृदय की भाव -तरंगें उछाल मारकर सबको भिगो देतीं ।उसकी बातें सुनकर लगता मानो पूरे गाँव -इलाक़े की सैर कर ली ।उसने बोलना शुरू किया — “ मैं जो कहूँगा ,अपनी आँखों देखी कहूँगा ,कानों सुनी नहीं ।मैंने जो जिया,वही कहूँगा ,मन से गढ़ी हुई नहीं ।सुनती जाओ…